Saturday, February 27, 2016

बदला हुआ बेटा


ताउम्र मरती है 
माँ 
बहने
बेटे और भाई 
के लिए
फिर भी 
कुछ नहीं कर पाती
पत्नी दो दिन में
घर की तस्वीर
बदल देती है
जिस बेटे ने 
कभी मुह न खोला हो
पिता के आगे
उगल देता है
फटाफट कैसे
पत्नियों फिर 
भोली सी बन जाती है
आप का बेटा है
आप जाने
कह कर आसानी से
छूट जाती है
चढ़ती रहती है 
दिन भर 
बुराई की पट्टी
उनका भी भाई है
ये क्यों भूल जाती है
देकर माँ को दुःख
क्या कोई बेटा 
कभी सुख पाया है
माँ के पैरों के नीचे 
स्वर्ग है बचपन से 
सुनता आया है
सारे खयालात 
दो दिन में गुम हुए 
जाते है
बेटे यु बदल जायेंगे
माँ बाप तो सोच भी नहीं 
पाते है
बेटी के हिस्से का भी
बचाकर बेटे को दिया
बदले में बेटा 
किसी और का हुआ
मैं कहती हूँ
छोड़ो अन्तर 
बेटी और बेटे का
अब तो आँख खोलो
देखो अन्तर्दृष्टि से
दोनों ही है 
कलेजे के टुकड़े
अब यही सोच रखो
पढ़ाओ बेटी को
दुनिया से लड़ने का
हौसला रखो........
(Jindagi channel dekhte hue upje kuch vichaar)

12 Comments:

At February 27, 2016 at 3:36 AM , Blogger रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (28-02-2016) को "प्रवर बन्धु नमस्ते! बनाओ मन को कोमल" (चर्चा अंक-2266) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

 
At February 28, 2016 at 7:53 AM , Blogger Shanti Garg said...

सार्थक व प्रशंसनीय रचना...
मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है।

 
At February 28, 2016 at 10:44 PM , Blogger Digamber Naswa said...

बेटी को अपने पाँव पे खड़ा होना चाहिए और इसके लिए माता पिता को इसका ख्याल रखना चाहिए ...

 
At February 29, 2016 at 6:28 AM , Anonymous Anonymous said...

सार्थक और उद्देश्य पूरक, सामाजिक सन्देश देती सुन्दर रचना ....
शुक्रिया ब्लाग की दुनिया पर सुन्दर प्रस्तुति के लिए .. :)

 
At March 2, 2016 at 3:30 AM , Blogger PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति.....बहुत बहुत बधाई.....

 
At March 3, 2016 at 12:12 AM , Blogger Kavita Rawat said...

अब यही सोच रखो
पढ़ाओ बेटी को
दुनिया से लड़ने का
हौसला रखो........

बहुत सुन्दर ..
भेदभाव से ही सारा झमेला खड़ा होता है ..

 
At April 6, 2016 at 2:50 AM , Blogger Aparna Khare said...

kavita rawat ji..shukriya apka rachna pasand karne ke liye

 
At April 6, 2016 at 2:50 AM , Blogger Aparna Khare said...

prasann vadan chaturvedi ji bahut bahut abhaar....apka

 
At April 6, 2016 at 2:51 AM , Blogger Aparna Khare said...

digambar naswa hi..shukriya apka

 
At April 6, 2016 at 2:52 AM , Blogger Aparna Khare said...

shanti garg ji.. jaroor ayenge apke blog par....shukriya sir

 
At April 6, 2016 at 2:52 AM , Blogger Aparna Khare said...

Roop chandra ji...abhaar apka rachna ko sanjha karne ke liye

 
At April 6, 2016 at 2:53 AM , Blogger Aparna Khare said...

anonymous..thanks

 

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