Monday, November 30, 2015

mera hona


जब भी मैं मुस्काती, 
तुम हंस देते हो..
जब मैं चुप हो आती..
तुम भी क्यूँ 
सब कुछ खो सा देते हो...
क्यूँ अटकती हैं तेरी साँसे..
मेरे होने और ना होने से..
मुझसे हैं ये तेरा जीवन 
क्यूँ ऐसा कह देते हो..
मुझको लगता हरदम डर सा..
तुमको बस खो देने का..
नही कर पाती इज़हार इसलिए..
तेरे अपना होने का..

3 Comments:

At December 1, 2015 at 11:15 PM , Anonymous Anonymous said...

nice ....:)

 
At December 4, 2015 at 11:11 PM , Blogger Nitish Tiwary said...

सुंदर और भाव विभोर कर देने वाली पंक्तियाँ लिखी है आपने.
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.
http://iwillrocknow.blogspot.in

 
At December 11, 2015 at 2:12 AM , Blogger Sanju said...

सुन्दर व सार्थक रचना ..
मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

 

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