Monday, December 28, 2015

जहीन हो तुम



तुम्हारा 
पैनापन
तुम्हारी 
ज़हीनत
सच
मुझे उलझा देती है
नहीं 
समझ पाती मैं
तुम्हारी दूरदर्शिता
खुद को 
बच्चा सा पाती हूँ
तुम हो कि 
न जाने
कहाँ तक 
सोच लेते हो
जहाँ तक 
मेरी बुद्धि की रश्मि 
पहुच भी नहीं पाती है 
तू भी न सच्ची
असंभव हो
अदभुत हो
अनमोल हो
दुनिया के सबसे 
जहीन इंसान हो

2 Comments:

At December 28, 2015 at 10:44 AM , Blogger Dr. Ashok Madhup said...

Waah Aparna Ji! Ati Sundar!!
Dr. Ashok Madhup

 
At December 28, 2015 at 9:40 PM , Anonymous Anonymous said...

:)

 

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