Tuesday, November 1, 2016

मर मर जीते रहे
अजीब सी जिंदगी
जीते रहे
चाहा जो पाना
उसे ईश्वर ने 
न माना

मनमानी करती रही
किस्मत अपनी चाले
चलती रही
मैं वक़्त का प्यादा बन
बस घर बदलता रहा
अजीब सी जिंदगी
जीता रहा
मरता रहा 
जीता रहा

कठपुतली हूँ शायद
जो वक़्त के जोर से
चलता हूँ
सोचता कुछ हूँ
कुछ और ही करता हूँ
हर वक़्त सवाल ढेरो ढेर
अपने से करता रहा
वक़्त हर बार 
मुझे छलता रहा
अजीब सी जिंदगी
जीता रहा
मरता रहा 

किससे करूँ शिकायत, किसका इंतज़ार करूँ


तुम्हारे जाने से 
थम गई है 
मेरी दुनिया
अब सब कुछ मुझे
रुका रुका सा
लगता है
साँसे जैसे अटकी हो
जिस्म में मेरे
बस कुछ यूँ
महसूस होता है
बात बात पे 
रोने का 
जी करता हूं
डबडबाई रहती है 
मेरी आँखे
आँखों में 
तुमको भर लेने का 
जी करता है
सोचती हूँ 
किस से करूँ शिकायत 
जो मेरे साथ 
बुरा चलता है
तुम थे तो जिंदगी 
कितनी आसान थी
अब तो बस हर वक़्त
मरने को जी करता है
काश तुम फिर से 
लौट आते
सब कुछ 
पहले जैसा हो जाता
खुशनुमा होती 
अपनी भी जिंदगी
तुम संग जीने का 
मज़ा आता

Saturday, October 29, 2016

miss u umesh bhaiya n papa ji

मुद्दते गुज़र गई 
दीवाली का दिया जलाये
अल्लाह से कह दो
अब किसी गम को
मेरे घर का पता न बताये

न जाने 
कितनी सदियों से
आइना नहीं देखा
खुद को 
मुस्कुराते नहीं देखा
कब तक फिरूँ मैं
झूठा चेहरा चिपकाये

काली अमावस बन कर
जो गिरी आंगन में
उस बिजली से
अब और किसी का घर
न बर्बाद हो, 
कोई ऐसा बम न फोड़े
ऐसा पटाखा न जलाये

(दोस्तों 24 सालों से न तो एक भी दीप जलाया है न ही दीपावली मनाई है काली दिवाली बनकर एक दीवाली आयी थी जो सारी खुशियां छीन ले गई)😢😢😢😢😢😢

Wednesday, October 26, 2016

पीला रंग , दो ख्याल एक साथ

उसके हाथों में सजी थी
लाल लाल चूड़ियां,
सुर्ख लाल जोड़े में सजी
दुल्हन, पिता उत्सुक
कब वो घडी आये जो
बेटी के हाथ पीले कर
कन्यादान करूँ
सौप दू अपने कलेजे का टुकड़ा
एक अजनबी को
जो उसे उम्र भर मान दे, 
सम्मान दे
पूर्ण कर दे उसे 
बेटी से पत्नी में
पत्नी से माँ में,
है पीला रंग 
संपूर्णता का
अलग एहसास का
जीवन में दो अलग लोगो के 
साथ साथ चलने का

था साथ चलने का इरादा
आगे बढ़ने का वादा
कुछ कर गुजरने का दावा
लेकिन वक़्त को 
कुछ और ही मंजूर था
मिले, साथ चले 
बिछड़ भी गए
दे गया एक साथ 
दुसरे को
न जाने कितनी यादें, 
उदास खाली रातें, 
पहाड़ से दिन,
सूखी बरसाते,
बर्फ सी सर्दियां,
तेज़ चटकीली गर्मियां
जर्द् पीला चेहरा
जो अब कभी नहीं होगा 
लालो लाल
पीला रंग 
तू क्यों नहीं रखता
मौत सी घसीटती, 
पल पल मरती
जिंदगी का ख्याल

कहाँ से लाउ वो 
मजबूत कलेजा 
जो तुम बिन 
मुस्कुरा सके, 
याद आते हो तुम बहुत, 
तुम्हे भुला सके

कई रातों से 
नहीं सोई हूँ मैं
दे सके थपकियां 
तुम्हारे जैसी
मुझको नींद भर
सुला सके

जीना पड़ता है 
बिना तुम्हारे 
नहीं मानती ये आँखे
तुम्हारी बातें
बस यु ही 
रहती है बरसती
आ जाओ 
थाम लो मुझको
कि इन बेचैन आँखों को 
थोड़ा आराम मिले।

पापा और 24 साल


ख्वाब की मानिंद 
कही खो गए
पापा आप 
हमसे बिछड़ कर 
कहाँ चल दिए

अभी तो हमने 
चलना भी नहीं 
सीखा था
दुनिया से अकेले 
लड़ना भी 
नहीं सीखा था
यूँ छोड़ मझधार में
हम सबको 
आप यूँ ही चल दिए

पता भी है आपको
आपके बगैर हम
पल पल  मरे है
मर मर के जिए है
नहीं था कोई 
मार्ग दिखाने वाला
लड़खड़ा कर चले है

पापा आपके सिखाये 
संस्कार हमें 
आज भी याद है
आपके पढ़ाये पाठ
मुहजुबानी याद है

बहुत करते है याद 
आपकी एक एक बात
आपसे ही मिली है हमको
हर सौगात
आपसे हमारा वजूद
आप है हमारे दिल में मौजूद
नमन आपको करते है
पापा हम आपको
बहुत याद करते है।

आज हमारे पापा को हमसे बिछुड़े 24 साल हो गए। 25.10.1992 रविवार, दिवाली का दिन, पूजा का समय यानि 7.15 बजे शाम पापा हमसे विदा ले कहीं और जा बसे।।।।

Monday, October 24, 2016

यादों का कारोबार

तेरी यादों के 
कारोबार से
मेरा खर्चा 
नहीं चलता, 

नहीं भरता 
पेट मेरा
आसानी से 
गुजारा भी 
नहीं होता

फिर भी 
न जाने क्यों
मेरा यादों का 
ये कारोबार 
बदलने का
दिल नहीं करता

तेरी यादों से 
हटने का 
दिल नहीं करता

अम्मी ने कहा था 
एक रोज
कारोबार अपने 
पसंद का करना
मुनाफा हो 
न हो
अपने लिए जीना, 
औरों के लिए मरना
हमेशा खुश खुश रहना
जो भी मिले दुनिया में
सबसे मोहब्बत करना।।।।।।।