Thursday, June 16, 2011

शिष्टाचार




पूर्वजो ने जो दी धरोहर
क्या हमने उसे संभाला हैं
या यू ही उसे ढोलक की मानिंद
पीट पीट कर फोड़ डाला हैं
मिले थे जो संस्कार हमे 
अपने बाबा दादा से
उन्हे ही हमने रौंद दिया
अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए
इच्छा की हाला को पीकर
नित नित जीते जाते हैं
नही उतरता नशा अहंकार का
बस यू ही पीते जाते हैं
अंधी दौड़ का नशा जो उतरे
तो दिखाई संस्कार पड़े
ना हम बेकार की बातून मे
आपस मे यू लड़े मरे
शिष्टाचार की बाते हमको 
एक कहानी लगती हैं
नानी ने जो थी सुनाई
ऐसी ये रवानी लगती हैं
एक बात तुम सुन लो प्यारे
शिष्टाचार ना आया हमको
तो कुछ भी ना आया हैं
कर लो चाहे जितनी उन्नति
फिर भी कुछ ना पाया हैं
शिस्ट हो आचार हमारा
ऐसा हम विचार करे
दे जाए दुनिया को कुछ ऐसा
की दुनिया हमको
युगो युगो तक याद करे.....अपर्णा


    • Manoj Gupta 
      शिष्ट+आचार अर्थात् शिष्टाचार अथवा यह कहें कि शिष्ट आचार करना शिष्टाचार है, जिसमें मनुष्य का व्यक्तित्व छिपा होता है। शिष्टाचार मनुष्य को मनुष्य कहलाने योग्य बनाता है, अन्यथा अशिष्ट मनुष्य तो पशु–तुल्य समझा जाता है।


      शिष्टाचार दर्पण के समान है, जिसमें मनुष्य अपना प्रतिबिंब देखता है।’

      शिष्टाचार मनुष्य के व्यक्तित्व का दर्पण होता है। शिष्टाचार ही मनुष्य की एक अलग पहचान करवाता है। जिस मनुष्य में शिष्टाचार नहीं है, वह भीड़ में जन्म लेता है और उसी में कहीं खो जाता है। लेकिन एक शिष्टाचारी मनुष्य भीड़ में भी अलग दिखाई देता है जैसे पत्थरों में हीरा।
      शिष्टाचारी मनुष्य समाज में हर जगह सम्मान पाता है- चाहे वह गुरुजन के समक्ष हो, परिवार में हो, समाज में हो, व्यवसाय में हो अथवा अपनी मित्र-मण्डली में।
      अगर कोई शिक्षित हो, लेकिन उसमें शिष्टाचार नहीं है तो उसकी शिक्षा व्यर्थ है। क्योंकि जब तक वह समाज में लोगों का सम्मान नहीं करेगा, उसके समक्ष शिष्टता का व्यवहार नहीं करेगा तो लोग उसे पढ़ा-लिखा मूर्ख ही समझेंगे; जबकि एक अनपढ़ व्यक्ति- यदि उसमें शिष्टाचार का गुण है तो- उस पढ़े-लिखे व्यक्ति से अच्छा होगा, जो पढ़ा-लिखा होकर भी शिष्टाचारी नहीं है।
      शिक्षा मनुष्य को यथेष्ट मार्ग पर अग्रसर करती है, लेकिन यदि मनुष्य पढ़ ले और शिक्षा के अर्थ को न समझे तो व्यर्थ है।

      June 6 at 3:55pm ·  ·  2 people

    • Manoj Gupta Am I Rite or ???
      June 6 at 3:55pm ·  ·  1 person

    • Aparna Khare absolutely correct...
      June 6 at 3:56pm ·  ·  1 person

    • Aameen Khan bahut sunder....... Insaan ki sahi pahachaan hi hai shishtachaar. Bakhubhi likha hai aapne yeh.
      June 6 at 3:58pm ·  ·  1 person

    • Aparna Khare Thanks Aameen ji
      June 6 at 3:59pm · 

    • Naresh Matia 
      shishtachar ko sahi paribhashit kiya aapne............par ek cheej se mai puri tarah sahmat nahi.......ki sanskaar jo baap-dada ne diya.....unhe hamne round diya.......mai aisa kabhi nahi manta..isme peechhli peedhi ka bhi utna hi hath hotahai........jitna ki us peedhi ka jise kasoorwar thahraya ja rahaa hai......aakhir bachcha kyo nahi seekhega.jab use sachche man se seekhaya jayega.....par use usi shardhaa se nahi seekhaya jata......bahut bar......ham khud hi soch lete hai ki.iski koi jaroorat nahi......aur pure bhav se nahi seekhate......kai bar hum jo seekha rahe hai..wo ham khud nahi theek se nibhate........lekin bachche....bol se jyada dekhkar seekhte hai.......isliye us waqt wo hamaare bol se jyada hamaare action par jyada dhyaan dete hain......aur yeh patan.peedhi dar peedhi hota aaya hain.isliye aaj ham is level par aa pahuche hain......yaur yeh hamesha mankar chalna chahiye ki agli peedhi peechhli peedhi se hamesha do kadam aage hi hogi...chahe wo kaise bhi karam ho....achche ya bure......isliye kisi ek ko kasoorwaar thahrana theek nahi iske liye....pechhli peedhi shayad jyada doshi hogi agar aap mamle ki tah mei jayenge.......

      June 6 at 4:35pm ·  ·  2 people

    • Aparna Khare thanks Naresh ji...kahi ham doshi kahi wo doshi
      June 6 at 5:25pm · 

    • Manoj Kumar Bhattoa Aparna Khare ji wah ! bahut sunder rachna likhi hai aap ne.....wah !
      June 6 at 5:50pm ·  ·  1 person

    • Aparna Khare thanks Manoj ji
      June 6 at 5:51pm · 

    • Iinder Pal Singh सुंदर संदेश देती हुई अति सुंदर रचना.......
      June 6 at 6:03pm ·  ·  2 people

    • Alam Khursheed वाह !
      बहुत उच्च और आदर्श विचार हैं आप के !
      ईश्वर हम सब को आप जैसा बना दे !

      June 6 at 7:25pm ·  ·  1 person

    • Kamlesh Kumar Shukla शिष्टाचार मनुष्य के जीवन मे होना ही चाहिए अथवा मनुष्य और पशु मे अंतर ही क्या रह जायेगा ...अरस्तू ने कहा है human is social being ...अपर्णा जी बहुत सुन्दर वर्णन किया है आपको साधुवाद ..हाँ आपको फिर से याद दिला रहा हूँ की आप या तो मुझे सर कहके संबोधित करे या फिर कमलेश कुमार शुक्ला जी वैसे नाम कभी आप नहीं लेती थी तो थोड़ा अटपटा लगा
      June 6 at 7:46pm ·  ·  1 person

    • Uday Tripathi nice one
      June 6 at 7:59pm ·  ·  1 person

    • Parveen Kathuria Aparna ji....sahi kaha aapne...jeewan mein shishtachar bahut jaroori hai....
      June 6 at 10:06pm ·  ·  2 people

    • Meenu Kathuria bahu surat pic...........bahut surat sandesh shistachar......jo hamare manav jeevan main bahut jaroori hai...........
      June 6 at 10:17pm ·  ·  1 person

    • Poonam Matia shishtaachaar ......jaroorat hai bahut iski kyonki manushya ek smaajik praani hai ..........achha topic .......nyc expression
      June 6 at 11:45pm ·  ·  2 people

    • Kump Singh Aparna Khareजी....शुक्रिया एवं अतिउत्तम पंक्तिया...........
      June 7 at 10:23am ·  ·  1 person

    • Niranjana K Thakur wah ! bahaut khubsruat !
      June 7 at 12:03pm ·  ·  2 people

    • Ashish Khedikar Gud 1... Keep it up...
      June 7 at 12:08pm ·  ·  1 person

    • Kiran Arya Aparna dost bilkul sahi kaha tumne agar ham dusro ke sath shisht acharan karenge tabhi to dusre bhi hamare sath achcha vyahaar karenge, ek achchi rachna.............:))
      June 7 at 4:17pm ·  ·  2 people

    • Kamal Kumar Nagal AAP NE BHARTIYA PARMPRA KE BARE ME BAHUT SUNDAR SABDO ME LIKHA HA.....BARO KA SAMMAN KARO KHUSHIYA AAP KE JEEVAN ME BANI RAHEGI ....
      June 8 at 4:00pm ·  ·  1 person

    • Meenu Vohra satya keha aapnae............!
      June 9 at 6:10pm · 

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home