Saturday, April 28, 2012

एक टुकड़ा धूप का -

 धूप की ताक झाक
आज भी चालू हैं
सुबह से ही खोज रही हैं..
जज्बातो को...........
जो उसे छोड़ कही और
अपना डेरा जमा चुके हैं
धूप हैं कि उसे पूरा भरोसा हैं
वो कहीं नही जा सकते उसे छोड़ कर
भले ही रात उसका कितना भी साथ दे....
कितनी भी वो काली हो जाए......या फिर
दिन भी उसके साथ हो जाए.................
छिपा ले अपने आप को बदली मे आज
उसे पता हैं उसके ज़ज्बात ........
उसे छोड़ कहीं ना जाएँगे..........
आज जो हो गये हैं धूप से गुस्सा
कल गुस्सा उतरते ही ..........
दौड़े चले आएँगे.......कहाँ देख पाएँगे
उसकी कोरो मे छिपे  आँसू
सॉरी बोल गले से लिपट जाएँगे..........
करेंगे गले मे हाथ डाल गॅलबहिया
पल मे सारा गुस्सा काफूर कर जाएँगे..
दौड़ जाएगी धूप के चेहरे पे खुशी की किरण
दोनो एक बार फिर फूले नही समाएँगे...

4 Comments:

At April 28, 2012 at 8:56 PM , Blogger प्रतिभा said...

सुन्दर अभिव्यक्ति ....

 
At April 29, 2012 at 11:27 PM , Blogger aparna khare said...

shukriya Pratibha ji...

 
At April 30, 2012 at 3:03 AM , Blogger उपासना सियाग said...

बहुत सुन्दर .....:)

 
At April 30, 2012 at 12:15 PM , Blogger aparna khare said...

thanks di

 

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