Monday, June 18, 2012

बूढ़े पेड़ की करुणा.....



जिंदगी की सांझ मे भी करुणा हैं
जो बचा हैं मेरे पास
ले जाए मेरा ही कोई खास
भले ना डाले मुझे जिंदगी भर घास
मैं यू ही रह लुगा
जिंदगी ही कितनी बची हैं
अब भी क्या मुझे जीने की पड़ी हैं
नही हैं फल, फूल तो क्या
लकड़ी तो बची हैं
ले जाओ मेरे बच्चो
आज नही तो कल तुमको
फर्निचर की ज़रूरत पड़ी हैं

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