Monday, December 9, 2013

तेरी पलको का बाल..



हथेली पे लेकर
तेरी पलको का बाल..
मैने माँगा था..
तुझे ही ईश्वर से..
नही बताया था.. तुझे तब...ये बात
क्यूंकी..
सुना हैं मैने कहीं ...
बताने से ख़तम हो जाता हैं
असर.............माँगी हुई मुरादों का..
सो डरती हूँ...
हर बार की तरह...
इस बार भी कही...
तुम्हे खो ना दू....हमेशा के लिए..

3 Comments:

At December 10, 2013 at 2:29 AM , Blogger Upasna Siag said...

nahi khoyenge ji ....bahut sundar

 
At December 10, 2013 at 8:21 PM , Anonymous Anonymous said...

like

 
At December 10, 2013 at 8:26 PM , Anonymous Anonymous said...

:(

 

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