Wednesday, June 6, 2018


तुम्हारी याद
उफ्फ
दिमाग से
जाती ही नही
तुम्हारा हंसना, बोलना
चलना, फिरना
मुस्कुराना, मजाक करना
सब अपनापन
खाली कर देता है मुझे
बहुत दिन हुए
तुम्हे देखा नही
इस सावन का जाना
ठंडी फुहार की तरह
समेट लूँगी तुम्हे
अपने दामन में
हमेशा की तरह
सुनो
अबकी बार
जाने न दूंगी
हमेशा के
इंतेज़ाम से आना

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