Thursday, August 23, 2018

बेचारी बुआ

चलो अच्छा हुआ
बुआ चल दी राम जी के पास
कब तक सहती हाड़तोड़ काम की मार
फूफा की बेजारी
कहते है एक पन में प्यार बहुत मिलता है
चाहे ससुराल में
चाहे मायके में
लेकिन बुआ तो प्यासी की प्यासी ही रही
कबीरदास के भजन की तरह
पाक पवित्र
ज्यूँ की त्युं धर दीनी चदरिया
धन्य थी बुआ
जो इतने दुख के बाद भी
बिना उफ्फ कहे
चली गई धरती से

1 Comments:

At September 2, 2018 at 3:10 AM , Anonymous Anonymous said...

:(

 

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