Sunday, March 11, 2012

यही है जिन्दगी --------!!!!!!


मन की पीड़ा 
मन मे रह जाती तो
नासूर बन जाती
अच्छा हैं रिस रिस कर
निकलती जाती हैं
दर्द का बह कर निकलना
ये दर्शाता हैं
अभी जान बाकी हैं
स्पंदन जारी हैं क्यूँ???

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