Wednesday, June 20, 2012


 
 
इनायत भी करती हैं इज़्ज़त भी करती हैं
गौर से देखे तो तुमसे ही मोहब्बत भी करती हैं

जुदा अंदाज़ हैं उसका..वो सीने मे रखती हैं
उसे बस दिखा नही सकती...

तुम्हे देख कर हो जाती हैं संजीदा
तुम कहते हो शरारत क्यूँ नही करती..

रहते हो उसकी हर गुफ्तगू का हासिल तुम
यही कारण हैं की फूलो को न्योछावर तुम पे नही करती

2 Comments:

At June 20, 2012 at 7:34 PM , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा!
शेअर करने के लिए आभार!

 
At June 21, 2012 at 2:21 AM , Blogger aparna khare said...

thanks to apka sir ji..

 

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