Thursday, May 2, 2013

अब तो तुम को खुद पे नाज़ होगा क्यूंकी खुदा ज़मीन पे तेरे साथ होगा..


कब तक पकडोगे खुदा की उंगली
उसके बच्चे हज़ार हैं
अब तुम हो गये हो बड़े..
अब तुम्हारे पास कई यार हैं..
हँसो खेलो..गुनगुनाओ उनके साथ..
छोड़ दो उसकी उंगली
पकड़ लो अब किसी बेसहारे का हाथ..

क्या करे उन धड़कनो का
जो उसके करीब आने से ही मचलती हैं..
ऐसी नाज़ुकी से तो हम तन्हा ही अच्छे..
जिनमे यादें तो रहती हैं..

ज़मीन के झटके तो खा कर फिर से पनप जाते हैं..
लोगो ने जो झटके दिए उनकी कोई संभाल नही..
हड्डिया भी चूर चूर हो जाया करती हैं..
नामो निशा नही रहता..इन्सा का..

तुझे भुलाना कोई आसान नही..
भूल भी जाए अगर तो जिंदा रहना आसान नही..

अधाई कोस भी चल पाए तुम..ये कॅमाल किया...वरना तो जाने कितने सायने आज भी वहीं खड़े हैं इंतेज़ार मे..

अब तो तुम को खुद पे नाज़ होगा
क्यूंकी खुदा ज़मीन पे तेरे साथ होगा..

कुछ नया नही हैं
बड़ा देख कर छोटा भूल जाते हैं..
मिलता हैं जब परायों से सुख अपना भूल जाते हैं

दिखता हैं जब सुंदर सा मुखड़ा
हम तो अक्सर अपना घर भी भूल जाते हैं..




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