Thursday, August 8, 2013

अनकहा सा रिश्ता जो ठहरा..तुमसे



बादलो के पार भी कोई रहता हैं.
तुम्हे नही मालूम...वो तुम्हे....
कितना याद करता हैं..अनकहा सा रिश्ता जो ठहरा..तुमसे

कहने सुनने को अब कुछ बचा नही...
एहसासो की बात करो..जज्बातों से प्यार करो..

किर्चि किर्चि बिखरे एहसासो को
अब कोई ना समेट पाएगा..
सच कहती हूँ जीते जी..अब इस जीवन मे
तेरे सिवा कोई और ना आएगा..



1 Comments:

At August 9, 2013 at 9:17 PM , Anonymous Anonymous said...

:)

 

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