Thursday, June 16, 2011

भूख


वो फुटपाथ पर चुपचाप पड़ी थी
आँखो मे दर्द की ना जाने कितनी 
लकीरे छिपी थी...
भूख थी जो थमने का नाम नही ले रही थी
बेचारी करवट बदल बदल कर रात गुज़ार रही थी
जितनी बार पेट से आवाज़ आती 
वो पानी का लंबा सा घूँट भर लेती
और चुपचाप पड़ जाती
ना जाने कितने दिनो से वो भूख को 
सहन किए जा रही थी
लेकिन पेट की आग तो बस
बढ़ती ही जा रही थी
क्या पानी कभी किसी की भूख को
मिटा पाया है??
क्या वो कभी रोटी की जगह ले पाया हैं
पानी तो सिर्फ़ प्यास बुझा सकता है
पेट की आग नही......
तभी दूर एक कार आ कर रुकती हैं
उसमे से एक दंपति उतरते हैं...
उनके पास सब हैं औलाद नही है..
अपने गम को कम करने की खातिर वो 
डबल रोटी बाँट रहे हैं
उसको भी कोई लाकर एक डबल रोटी का टुकड़ा
कोई दे देता हैं....
जिसे वो पानी मे भिगोकर हलक से
चुपचाप उतार लेती हैं
चलो आज की भूख तो विश्राम पा गई...
कल की क्या पता आएगा भी या नही....
कौन जानता हैं????

    • Vinay Sharma Try writing it as a story, will make real effect.
      June 2 at 1:17pm ·  ·  2 people
    • Aparna Khare hmm
      June 2 at 1:17pm ·  ·  1 person
    • Kamal Kumar Nagal bahut sundar sabdo me haqikat pess ki ha....
      June 2 at 1:24pm ·  ·  1 person
    • Om Prakash Nautiyal दिल को झकझोर देने वाले सत्य की अभिव्यक्ति है । बहुत खूब !! *
      June 2 at 1:38pm ·  ·  2 people
    • Aparna Khare THanks Kamal ji...
      June 2 at 1:39pm · 
    • Aparna Khare Shukriya.....Om Prakaskh jio..
      June 2 at 1:39pm · 
    • Manoj Gupta है बड़ा अल्लाह न भगवान है, आदमी की भूख ही सबसे बड़ी है
      June 2 at 1:48pm ·  ·  2 people
    • Kump Singh एक भूख ही है जो इंसान को निकम्मा नही रहने देती है............
      बहुत अच्छी बात लिखी है बहन......शुभाशीष,
      June 2 at 2:02pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare bhookh hi to hame sacchai dikhati hai.....
      June 2 at 2:04pm · 
    • Aparna Khare sach kaha Kump Singh ji
      June 2 at 2:04pm · 
    • Indu Sharma bhookh to rote he magte hai
      June 2 at 2:58pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare sach kaha apne....
      June 2 at 2:59pm · 
    • Manoj Gupta जो भूखे थे
      वे सोच रहे थे रोटी के बारे में

      जिनके पेट भरे थे
      वे भूख पर कर रहे थे बातचीत
      गढ़ रहे थे सिद्धांत
      ख़ोज रहे थे सूत्र ....

      कुछ और लोग भी थे सभा में
      जिन्हौंने खा लिया था आवश्यकता से अधिक खाना

      और एक दूसरे से दबी जबान में
      पूछ रहे थे
      दवाईयों के नाम ...
      June 2 at 3:02pm ·  ·  2 people
    • Aameen Khan beautiful poem.
      June 2 at 3:06pm ·  ·  1 person
    • Manoj Gupta भूख आती थी
      वह उसे मार देता था

      भूख जिन्दा हो जाती थी
      वह फिर उसे मार देता था

      भूख लौट-लौट कर आ जाती थी
      वह उसे उलट-उलट कर मार देता था

      एक दिन भूख दबे पांव आई
      और..
      उसे खा गई
      June 2 at 3:07pm ·  ·  1 person
    • Kiran Arya Aprna dear ek gareeb ki bhoobh aur vyakulata ko bahut achche se darshaya hai tumne, uska bebas chehra aa gaya nazaro ke saamne..........shabd nai hai kuch kahne ko mitr..............
      June 2 at 4:34pm ·  ·  2 people
    • Aparna Khare sach hai kiran...bhookh bhi bahut ajeeb hoti hai...sab kuch karne ko mazboor kar deti hai
      June 2 at 4:36pm ·  ·  1 person
    • Niranjana K Thakur bahut khubsurat likha hain aapne !
      June 2 at 4:50pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare thanks Niranjana ji
      June 2 at 4:51pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare Thanks Manoj ji
      June 2 at 4:52pm · 
    • Aparna Khare Thanks Aaameen ji
      June 2 at 4:52pm · 
    • Kamlesh Kumar Shukla बहुत उम्दा रचना है जो यह बताती है कि २००/- की आइसक्रीम की ब्रिक को आधी खाकर बाकी फेंकने वालों और और १ रोटी को तरसते लोगों के पेट के भूगोल मे कितना अंतर है..."लखनऊ के रेलवे स्टेशन पर विज्ञापन बोर्ड के नीचे भूख से एक बालक मर गया नाम था 'कमलेश'... बोर्ड पर लिखा था भारत एक कृषि प्रधान देश" ..अपर्णा जी मार्मिक दृश्य है ये रचना नहीं है ..जो दर्शाता है आप कितनी करुण है
      June 2 at 6:05pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare sach kaha apne kitna waste karte hain hum sab khud bhi na kare aur baccho ko bhi sikhaye...
      June 2 at 6:06pm · 
    • Ajay Khare itna centy........
      June 2 at 11:05pm ·  ·  1 person
    • Meenu Kathuria Aparna Khare ji papi pate ka sawal hai......
      June 3 at 12:04am ·  ·  1 person
    • Ashish Khedikar ✿ܓ✿ܓ
      June 3 at 12:19am ·  ·  1 person
    • Naresh Matia bhookh kya hoti hain.uska sateek chitran kiya hain aapne.........bhookh khane se hi mil sakti hain.paani ke paas bhi uska koi jawaab nahi hain..bilkul sahi kahaa aapne...........ak achchi rachna..........
      June 3 at 3:57pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare Ajay Khare..hanji....isse bhi jyada...bhook santi kar deti hain
      June 3 at 4:02pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare Meenu Kathuria ji sach kaha apne
      June 3 at 4:02pm · 
    • Aparna Khare thanks Ashish ji
      June 3 at 4:02pm · 
    • Aparna Khare Thanks Naresh Matia ji..
      June 3 at 4:03pm · 

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