Tuesday, June 28, 2011

रोशनी और मनुष्य


सूर्य डूब रहा है स्वय को
गहन तिमिर मे 
छिपाने के लिए
जीवन भी रेल की
पटरियो पर भाग रहा है 
चिर अनंत मे
मिल जाने के लिए
क्या
जीवन और सूर्य की
एक ही नियति है?
उसे डूब कर फिर से
उदय होना है
दुनिया को अपनी
चमकीली रोशनी से भर देना है
ताकि दुनिया के
कामो को
गति मिल सके
हम जहा खड़े है
उससे बहुत बहुत आगे बढ़ सके
इसी प्रकार
जीवन को भी 
चिर अनंत के बाद 
दोबारा जनम लेना है
एक नई दुनिया
फिर से बसानी है
ताकि सूर्य ने
जो रोशनी फैलाई है
उस रोशनी की 
सार्थकता को सिध कर सके
स्वय को सिध कर सके
रोशनी और मनुष्य
एक दूसरे से मिलकर
एककार हो सके..

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