Tuesday, June 28, 2011

बंद मुट्ठी लाख की


 बंद मुट्ठी लाख की
खुल जाए तो खाक सी
बंद विचार लाखो के..
खुल जाए तो
सिर्फ़  बातो से  
विचारो को मॅन मे रखे
उनको बाहर विस्तार ना दे
वक़्त आने पर ही
बाहर का प्रकाश दे
दुनिया तो सिर्फ़
मौके की अभिलाषी है
आ गये जो 
विचार सामने
हस्ने से ना चूकती है
खोले ना कभी अपने पत्ते
रुके, उचित समय की
तलाश करे
मुट्ठी को सदा बंद ही रखे
हस्ती को सदा निर्बंध ही रखे
तब कहलाए लाख की
बंद मुट्ठी लाख की..
खुल जाए तो खाक की..




मुट्ठी का अपना ही महत्व है। बँधी हुई मुट्ठी कई बार बड़े-बड़े फैसले सहज ही करा देती है। कसकर बंद की हुई मुट्ठी और आँखों में उभरते लाल डोरे यदि थोड़ा-सा भी प्रभाव विपक्षी पर डाल सकें, तो उसकी चीं बोलते देर नहीं लगती। वैसे भी यदि किसी को थप्पड़ मारा जाए, तो वह उतना कारगर साबित नहीं होता, जितना कि यह बँधी हुई मुट्ठी। इसका भी एक कारण है। थप्पड़ मारते समय हथेली खुली रहती है।
अंगुलियाँ हलकी-हलकी बेमन से एक-दूसरे के साथ सटी रहती हैं, जबकि मुट्ठी बँध जाने पर वे सब एकजुट हो जाती हैं और उनमें दृढ़ता आ जाती है। और साहब जहाँ एकता है, दृढ़ता है वहाँ ज़ोर होना स्वाभाविक ही है।

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