Monday, July 11, 2011

अनंत आकाश


उड़ना जरुरी हो तो 
पंख फैलाओ ज़रा 
सच तो ये है की 
व्योम की कोई 
पैमाइश नहीं है -----?


माना आकाश अनंत हैं
चाहत भी अनंत हैं
खुला गगन हैं
खुशियो से मॅन भी
मगन हैं
लेकिन मेरे दोस्त
पँखो की उड़ान तो
सीमित हैं.....
नही नाप सकते 
अपरिमित पूरे व्योम को
व्योम बड़ा.............
और पंख कोमल हैं


भावनाए कोमल हो सकती है 
मन मजबूत होना चाहिए 
व्योम कि बात क्या करूँ---
अब जजबात मुखरित 
होना चाहिए ------------
नई हो चली है परिध अब 
कदम उठाना चाहिए -----?




मॅन मज़बूत हैं 
पर्वत जैसा
विस्त्रत खुला गगन हैं
जज्बातो की आँधी 
दिल मे......
मन मे लगी अगन हैं
पकड़ के अपनो का हाथ
चलेंगे दूर गगन मे
सीमा नापेंगे....
परिधि जचेंगे...
रचेंगे इतिहास व्योम पे..





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