Monday, July 18, 2011

जो तू लगा सके मुझपे इल्ज़ाम

नही किया 
कोई ऐसा काम
जो तू लगा सके 
मुझपे इल्ज़ाम
खुदा का नाम लेता हूँ
उसी की धुन मे रहता हूँ
ना किसी से दोस्ती 
ना किसी से दुश्मनी
हमेशा सम मे रहता हूँ
मेरा घर मेरी ज़मीन हैं
मुझे मेरी ज़मीन
सबसे अज़ीज हैं....
मरने के बाद 
पनाह मिलनी हैं....
मेरी माँ हैं ये ज़मीन
कैसे भूल सकता हूँ.
माँ के पैरो तले 
जन्नत होती हैं....
इसी जन्नत मे मुझे 
रहना हैं..........

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