Wednesday, July 27, 2011

आज भी अच्छा लगता है


आज भी अच्छा लगता है
अतीत के पन्ने पलटना
तुम्हारी यादो को हवा देना
उन यादो के साथ 
इतनी दूर निकल जाना
कि वापस लौटना याद ही ना रहे..
मन के किसी कोने को कुरेदना....
उसमे तुम्हारी सिहरन को 
महसूस करना
तुम्हारा बारिश मे भीगना..
और मेरे 
मना करने के बावजूद भी...
मुझे पूरा भिगो देना.................
सर्द रातो मे साथ बैठकर 
चाय की चुस्किया भरना...
चाय मे से उठती गर्म भाप को
एक साथ महसूस करना....
तुम्हारे सारे काम 
अपने हाथ से करना
तुम्हारे हाथ के लिखे खतो को 
बार बार पढ़ना......................
फ़ुर्सत के पलो मे
तुमसे बाते करना
आज भी अच्छा लगता हैं...............



0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home