Wednesday, August 24, 2011

बाहर बाहर क्यूँ रहते हो?

अंदर भी तुम, बाहर भी तुम
नीचे भी तुम, ऊपर भी तुम 
इधर भी तुम, उधर भी तुम
हर साँस मे तुम, हर बात मे तुम
फिर भी तुम ये कहते हो
बाहर बाहर क्यूँ रहते हो? 
यादों के हर शाख पे तुम 
मौसम के हर पाख में तुम 
सागर में तुम, दरिया में तुम 
रग रग में तुम ही बहते हो
फिर भी तुम ये कहते हो 
बाहर बाहर क्यूँ रहते हो ?...........
बाहर कैसे रह सकते हैं
क्या तेरे बिन जी सकते हैं
पूछो अपने आप से तुम..
सोचो फिर बार तुम..
हाँ हमको ....
अंदर आने मे डर लगता हैं
सांसो का पहरा दिखता हैं 
नज़र नही आता अंधेरे मे कुछ  
धुंधला सा चेहरा दिखता हैं
समझ नही आता हैं हमको
वो किसका चेहरा हैं....
तेरा हैं या मेरा हैं....
बाहर आ कर समझा दो..
तुम ही कुछ बतला दो..
मन का द्वंद मिट जाए
मेरी मुश्किल हल हो जाए...



    • Govind Gopal Vaishnava तुम ही कुछ बतला दो..
      मन का द्वंद मिट जाए
      मेरी मुश्किल हल हो जाए...Very impressive...
      August 27 at 1:44pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare thanks Govind ji
      August 27 at 1:45pm ·  ·  1 person
    • Reenu Gupta अंदर आने मे डर लगता हैं

      सांसो का पहरा दिखता हैं

      नज़र नही आता अंधेरे मे कुछ

      धुंधला सा चेहरा दिखता हैं

      समझ नही आता हैं हमको

      वो किसका चेहरा हैं....

      तेरा हैं या मेरा हैं....

      बाहर आ कर समझा दो..

      तुम ही कुछ बतला दो..

      bahut khoob di...................
      August 27 at 1:49pm ·  ·  3 people
    • Aparna Khare thanks Reenu
      August 27 at 1:50pm ·  ·  2 people
    • Gaurav Sharma चराग़ों ने अपने ही घर को जलाया
      कि हैरां है इस हादसे पर पराया.
      किसी को भला कैसे हम आज़माते
      मुक़द्दर ने हमको बहुत आज़माया.
      दिया जो मेरे साथ जलता रहा है
      अँधेरा उसी रौशनी का है साया.
      August 27 at 1:51pm ·  ·  2 people
    • Aparna Khare thanks Gaurav Sharma....
      August 27 at 1:53pm ·  ·  1 person
    • Manoj Kumar Bhattoa wah ! har taraf tum hi tum...........
      August 27 at 1:54pm ·  ·  2 people
    • Aparna Khare thanks Manoj Kumar Bhattoa ji
      August 27 at 1:54pm · 
    • Maya Mrig द्वन्‍द्व जब भी मिटेगा---खुद से मिटेगा---धुंधले चेहरे साफ देखने को आंख पे भरोसा रहे बस----
      August 27 at 1:59pm ·  ·  2 people
    • Gaurav Sharma दिन को भी इतना अन्धेरा है मेरे कमरे में
      साया आते हुए डरता है मेरे कमरे में
      ग़म थका हारा मुसाफ़िर है चला जाएगा
      कुछ दिनों के लिए ठहरा है मेरे कमरे में
      August 27 at 2:00pm ·  ·  3 people
    • Aparna Khare thanks Maya sir..kabhi kabhi saghan ghanghor andhkaar me hath ko hath bhi nahi sujhai deta aise me koi apna yadi sath de to sab saaph dikhne lagta hain
      August 27 at 2:01pm ·  ·  2 people
    • Aparna Khare gam ki kamre me koi jagah nahi hain mere dost...ye to wo jagah hain kaha khushi chidiya ki tarah chahchahaya karti hain
      August 27 at 2:02pm · 
    • Maya Mrig खूबसूरत पंक्तियां गौरव शर्मा जी----ग़म थका हारा मुसाफ़िर है चला जाएगा
      कुछ दिनों के लिए ठहरा है मेरे कमरे में
      August 27 at 2:03pm ·  ·  1 person
    • Gaurav Sharma बिन बरसा इक बादल-सा
      मन है गुमसुम पागल-सा
      अबके वो रोया ऐसे
      हर आँसू गंगाजल-सा
      आँखे छल-छल करती हैं
      पर चेहरा है निश्छल-सा
      August 27 at 2:06pm ·  ·  2 people
    • Gaurav Sharma मेरा रोशनी से कोई नाता नहीं
      मैं इसलिए चिराग़ ज़लाता नहीं
      बर्फ़ का खंज़र लगा है सीने में
      दिल को आँच कोई दिखाता नहीं
      August 27 at 2:07pm ·  ·  2 people
    • Aparna Khare मीठी हैं तुम्हारी बाते..
      प्यार से तू प्यारा
      मन हैं तेरा कोमल सा
      आँखे हैं तेरी गहरी
      तारीफ करू क्या तेरी
      तुझमे अपना रूप पाया
      August 27 at 2:10pm ·  ·  2 people
    • Gaurav Sharma nice aparna ji
      August 27 at 2:12pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare रोशनी करना भी ज़रूरी हैं
      अंधेरे को हटाना भी ज़रूरी हैं
      वरना खंजेर लगते रहेंगे सीने म
      दुश्मनी को हटाना भी ज़रूरी हैं
      August 27 at 2:12pm ·  ·  1 person
    • Gaurav Sharma मायूस न हो ऐ दिल दुनिया के सताने से
      रिश्ता तो मोहब्बत का निभता है निभाने से
      ये प्यार है वो जज़्बा तासीर अजब जिसकी
      मिलता है मज़ा इसमें घर बार लुटाने से
      August 27 at 2:13pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare गर मिलता है मज़ा घर बार लुटाने से
      राज़ी हूँ मैं अपना सुख चैन गवाने मे
      रिश्ता ए मोहब्बत तब भी तो निभ जाए
      पैग़ामे मोहब्बत सब तक तो पहुच जाए
      August 27 at 2:15pm · 
    • Gaurav Sharma मेरी राहों पर चल के देखे कोई
      मेरी फैली हुई बाहों में समाए कोई
      मैं मंज़िल पर हो कर भी बहुत दूर हूँ मंज़िल से
      मेरी रास्तों को मंज़िलों से मिलाए कोई
      August 27 at 2:15pm · 
    • Aparna Khare maine apni galti sudhaar di....
      August 27 at 2:27pm · 
    • Gaurav Sharma यह जो बिखरे हुए से अल्फ़ाज़ हैं मेरे
      इन्हें दिल में अपने समेट के अब नये अर्थ दे जाए कोई
      बहुत थकी और दर्द से बोझिल हैं मेरी आँखे
      अब इन्हें एक पल कि नींद सुलाए कोई
      August 27 at 2:28pm ·  ·  1 person
    • Gaurav Sharma तुम्हें जब याद करता हूँ मैं अक्सर गुनगुनाता हूँ
      हमारे बीच की इन दूरियों को यूँ मिटाता हूँ
      इबादत के लिए तुम ढूँढते फिरते कहाँ रब को
      गुलों कों देख डाली पर मैं अपना सर झुकाता हूँ
      नहीं औकात अपनी कुछ मगर ये बात क्या कम है
      मैं सूरज कों दिखाने दिन में भी दीपक जलाता हूँ
      August 27 at 2:31pm ·  ·  1 person
    • Gaurav Sharma किसी की मौत पे अश्क बहाना ठीक नहीं,
      रूह खुदसे या, खुदा से मिल रही होगी।
      August 27 at 2:35pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare ruh ruh se mil jayegi...lekin jo hame chod gaya..uski to yaad ayegi
      August 27 at 2:36pm ·  ·  2 people
    • Gopal Krishna Shukla सुन्दर शब्द संयोजन अपर्णा जी..... पूरी रचना मे "हम-तुम" का वर्णन वाकई काबिले-तारीफ़ है.... बहुत खूब...
      August 27 at 3:15pm ·  ·  2 people
    • Aparna Khare thanks Gopal Krishna ji
      August 27 at 3:19pm ·  ·  2 people
    • Rajiv Jayaswal sab jagha tum hi tum, main bhi tum mein hua hun gum.
      August 27 at 3:24pm ·  ·  1 person
    • Aparna Khare thanks Rajiv ji
      August 27 at 3:31pm · 
    • Rahim Khan good one aparna ji
      August 27 at 3:57pm ·  ·  1 person
    • Ashish Khedikar Sundar rachna...Shukriya Aparna Ji
      August 27 at 5:25pm ·  ·  2 people
    • Rajani Bhardwaj mn ki si saral aparna...........
      August 27 at 5:57pm ·  ·  1 person
    • Parveen Kathuria bahut badhia rachna......
      August 27 at 9:38pm ·  ·  1 person
    • Niranjana K Thakur bahaut khoobsurat !
      August 27 at 9:45pm ·  ·  1 person
    • Meenu Kathuria Bin bole tumhare dil ki awaaz mere dil tak pahunch jati hai
      pyar mein dooriyan bhi mit jati hai
      bas aisehi mujhe tumhare dil mein samhaye rakhna
      pyar ka ye karava hamesha banaye rakhna…............
      August 27 at 11:15pm ·  ·  2 people
    • Chitra Rathore khoobsurat ehsaason ki...khoobsurat abhiwayaki ...Aparna ji...
      mujhmain tu...tujhmain...main hun...
      teri shakhshiyat ki...hi...to main...ek shai hun...
      fir kaisaa ye shubhaa...kyoun ye gilaa hai...
      terey hi ehsaaso...sey...to...armaano ko mairey....rang milaa hai...
      August 28 at 2:53pm ·  ·  2 people
    • Aparna Khare thanks to all my lovely friends...Chitra ji, Meenu Kathuria ji, Niranjana K Thakur ji Parveen Kathuria ji, Rajni ji, Ashish Khedikar ji Rahim ji...
      2 seconds ago · 

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home