Saturday, October 15, 2011


आपके प्रशन का उत्तर 
हमे आता हैं
जानने की शक्ति से 
बड़ी हैं........
मानने की शक्ति
और मानने की शक्ति से भी उपर हैं 
करने की शक्ति.......
जो सबके पास नही होती
जानते तो सब हैं
मानता कोई कोई हैं
करता तो लाखो मे कोई एक हैं...
सूर, तुलसी या कबीर जैसा
नानक, रामतीर्थ,विवेकानंद जैसा 
आप भी अगर जानने की जगह 
मानने लग जाए तो आधा काम पूरा
और अगर कर डाले तो 
अभिशप्त नही मुक्त कहलाएँगे
और उपरोक्त संतो की तरह 
जगमगाएँगे...............

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