Tuesday, October 11, 2011

डायरी का सबसे खूबसूरत पन्ना


तुम मेरी डायरी का सबसे 
खूबसूरत पन्ना हो
जिस पे अंकित हैं 
ना जाने कितने प्रेम के शब्द
जिनको चाहा था तुमने 
मन ही मन गोपनीय रखना 
कोई नही थाह सकता हैं तुम्हारे
सागर जैसे मन की
गहराई को
प्यार को सहेजना कोई तुमसे सीखे
कभी भी तुमने हमारे प्यार को
सबके सामने नही खोला........

मैं भी अपना कर्तव्य निभाउँगा
कभी ना नाम लूँगा तुम्हारा
गुज़रना पड़ा तो 
आग के दरिया से गुज़र जाउगा
मान लो कभी दिख गया 
नक्शे पे तुम्हारा शहर
धीरे से पेन्सिल वहाँ से हटा लूँगा
किसी को भी खबर ना लगने दूंगा
आँख के कोरो को छिपा लूँगा
जब कभी भी जेहन के नक्श पे
उभरेगा तुम्हारा चेहरा
अपनी कविताओ मे 
उसे आत्मसात कर लूँगा
नही करूँगा किसी से 
अपने प्रेम की बातें
कुछ को खुद से 
छिपा कर रख लूँगा
मत करो चिंता
तुम हमारे प्यार के आम होने की
नाम को तुम्हारे अपने 
लब से जुदा कर दूँगा...

यही गुज़ारिश मैं 
तुमसे भी करता हूँ
मत लेना नाम मेरा 
जब कोई पूछे तुमसे 
मेरे बारे मे कोई सवाल
तुम भी खामोश रह जाना
ना देना कुछ जवाब
मन मे जज़्ब कर लेना
और डायरी के महत्वपूर्ण पन्ने की 
अपने हिसाब से संभाल कर लेना

1 Comments:

At October 12, 2011 at 12:33 AM , Blogger aparna khare said...

तुम खुश हो जाया करती थी
मेरी हर छोटी से छोटी बातों पर
मेरी बेतुकी कवितायों की भी तुम
तारीफें करती नहीं थकती थी
मेरी लिखी हर कविताओं में
छवि तुम्हारी होती थी
और तुम उन कविताओं को
सहेज कर अपने पिंक कलर के
डायरी में लिख लेती थी
काश, की उन कविताओं की तरह
मैं तुम्हे भी कहीं सहेज के रख पाता

 

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home