Wednesday, October 12, 2011

छठी इंद्रिय


अनकहे को समझना
उसका गुण हैं शायद
क्यूंकी हर तितली के पास 
होती हैं छठी इंद्रिय
जिस से वो अंजाने 
ख़तरो को भी भाँप 
लिया करती हैं
बचा लेती हैं
अपने आप को
उन भवरों से 
जो उसे बेवजह
परेशान किया करते हैं
लेकिन वहाँ दे देती हैं 
अपना सर्वस्व
जहाँ कोई उससे 
कुछ नही चाहता
नही रहती कुछ भी 
बचाने की मंशा उसकी
समझ जाती हैं 
दिल की हर बात
जो उसके पास से
होकर गुजरती है
जगा देती हैं
प्यार की उम्मीदें 
सोए हुए मॅन मे....
लेकिन मुझे पता हैं
मुझे उसको छूना नही हैं
छूने से उसका अस्तित्व
तार तार हो जाएगा
और कुछ भी
हाथ नही आएगा...


    • Vandna Tripathi बहुत सुन्दर लिखा है अपर्णा...ये तितलियाँ बड़ी प्यारी...बड़ी नाज़ुक...बड़ी समझदार भी...हर आहट पे चौंक चौंक जाती हैं....दिल को लुभाती है....हाँथ किसी के न आती हैं....पर जो समझ लेते हैं इनके मन को...उनके दिल पर अपने परों के सतरंगे ...रंग छोड़ जाती हैं...
      Tuesday at 4:24pm · 

    • Prem Tanmay अनकहे को कहना ही कविता की विशेषता होती है .जिसे समझ भी जाये और कहे कुछ भी नहीं
      Tuesday at 4:32pm ·  ·  1 person

    • Nirmal Paneri जो उसके पास से
      होकर गुजरती है
      जगा देती हैं
      प्यार की उम्मीदें
      सोए हुए मॅन मे..!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

      Tuesday at 9:57pm · 

    • Mutha Rakesh titli ke bahane ....aapne kavita mein kai arth diya hai jo jhilmilate hai ....wakai titli ...ko jo pakadne ki kosisi kere wo kabhi use choo nahi paataa ..wo to achanak aaker baithti hai jaha wo baithna chahti hai ....sunder bhav
      17 hours ago ·  ·  2 people

    • Chandrasekhar Nair प्राकृतिकतापूर्ण ..
      16 hours ago via mobile ·  ·  1 person



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