Saturday, October 15, 2011


दादा का प्यार
वंदना जी की मनुहार
राहुल जी के नित नये प्रयोग
प्रतीक संवर का क्यूट सा व्यवहार
सुमन के तेवर, विजया जी का बिंदासपन
कमलेंद्र, जितेंद्र जी की कलम का कमाल, 
माया सर, मुथा सर का सिर पे हाथ
यही हैं हमारे संकेत प्रचेत की खास बात
प्यारा और नटखट ब्योहार,
सबकी प्यारी सबसे सरोकार 
हंसती है तो सब गुलजार...
सब हस्ते तो हम हस्ते हैं
सब रोते तो हम भी रोते
बिना तुम्हारे रह ना पाते
तुम सब मेरे मन भाते
दिया तुम लोगो ने इतना प्यार
अब लाना हैं पूनम जी को
चलेगी अब उभान जी की भी तलवार

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