Saturday, April 21, 2012


मुझको याद है वो पल

जब कहा था ----
सब्ज - ए- मखमल पर 
लरजती सी आहटे,
शाही कदमो के 

अहसास हुआ करते है !
मुमताज -ए -अश्क-ए -गोहर 

शफाक चांदनी में ,
शबनमी कतरों में वो 

जिया करते है !

---आज भी सब याद है -----...

यादो को कारवा को आगे ले जाते हैं
फिर से वही सब दोहराते हैं
नही हुए हो तुम बुड्ढे
अभी हम भी जवान नज़र आते हैं
चलो छेड़े तान प्यार की...
प्यार का सुर लगते हैं....
अब तो हैं बहुत से दोस्त साथ....
उनसे भी तबला बजवाते हैं.....
नया सफ़र नई डगर.....
चलो नया जहाँ बसाते हैं

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