Sunday, October 14, 2012

मौत को भी मोहब्बत से निभाएँगे हम



किसी के अंधेरा करने से क्या अंधेरा होता हैं..
ज़ुल्म तो ज़ुल्म हैं कैसे सर होता हैं
आ जाएँगे उजाले घर की झिर्री से..
देखिए तो सही...सच मे बड़ा असर होता हैं..

मौत को भी मोहब्बत से निभाएँगे हम
तेरे दर पे खुशी खुशी चले आएँगे हम...

तूने जो लहराया आँचल..
बढ़ गई धड़कने हमारी..

उम्र बढ़ती गई..प्यास बढ़ती गई..
जिंदगी यारों बोझ बनती गई..

भाग्य का लिखा कौन बाचेगा दी...
वो तो पन्ना दर पन्ना खुलता जाता हैं..

सितारे की चाहत चंद्रमा मिले..
चंद्रमा की चाहत कौन पूछे..
दोनो को अपना अपना हिस्सा मिले...
यही हैं जिंदगी..

बनो तुम खूबसूरत जिंदगी का हिस्सा
अगला साल हो तुम्हारे लिए बहुत अच्छा...
जिंदगी मे आगे बढ़ते जाओ..
कभी ना याद आए अपर्णा की .....
बस आगे चलते जाओ....

परी नही चाहिए एक दुल्हन चाहिए..
जो करे मेरे  माता पिता की सेवा.....
मेरा घर महकाय....
जब आप कभी हमारे घर आए तो..
बनाकर चाय अपने हाथो से पिलाए..
दिला दो दी ...एक ऐसी लड़की..
जो हो संस्कारो मे सुशील, बिल्कुल मेरे घर सी..

दिल से करनी थी तारीफ उन्होने शब्दो मे कर दी
मैने कहा आपने क्यूँ  हक़ीक़त ही बया कर दी..

बिखर के हवा मे उस तक जो पहुच जाता हैं..
समझो मक़सद जिंदगी का वो पा जाता हैं...

किसी के अंधेरा क्या अंधेरा क्या होता हैं..
ज़ुल्म तो ज़ुल्म हैं कैसे सर होता हैं
आ जाएँगे उजाले घर की झिर्री से..
देखिए तो सही...सच मे बड़ा असर होता हैं..


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