Sunday, October 28, 2012



नही देते किसी को आज़माने का मौका
हम जो भी करते हैं दिल से करते हैं....


आपबीती थी ऐसी हमारी ...कोई ना रह सका सुन के अपने मे...
सब को याद आ गया अपना जमाना..अपने आँसू, अपना फसाना

इन फीके क़िस्सो मे एक किस्सा अपना भी हैं...
याद करेंगे उसे और रो लेंगे..तुम्हारे साथ

कन्हैया होगा जहाँ राधा भी वही होगी...
कन्हैया बिना एक पल भी कहाँ सो सकेगी..

गर होता रहा बेटियो का कत्ल..
बेटे भी कहाँ बचेंगे....अगली पीढ़ी कहाँ से आएँगी

तेरे गमो से मेरी प्रीत....कैसी ये प्यार की रीत

इस बरस मोहब्बत हो गई तुम्हे तो अच्छा होगा
मौत का भी कितना अच्छा मंज़र होगा

मर गये तुम तो मोहब्बत कहाँ रहेगी....
दिलो मे जो रही जिंदा...बरस दर बरस

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