Tuesday, November 6, 2012



  बेटियों का क्या हैं जहाँ जाएगी फूल खिला देंगी 
तुम्हारा आशियाना सजा देंगी, तुम ही देते हो सजा उनको
कभी जीने की, कभी मरने की

मुझे मालूम हैं रूठना भी कोई आसान नहीं
करते हो ये सब मुझेमनाने  के लिए 
प्यार जो बहुत करते हो मुझसे 

मान गए जो आपकी बात 
पछताते हुए बीत जाएगी तमाम रात 

प्यार की हर अदा तुम्हारे लिए 
बचना बचाना, छिपना छिपाना शर्मो हया
रंग हैं प्यार के।।

चढाया  जो रंग तुमने इतना गहरा कैसे उतरेगा 
प्यार हैं रंग हैं ये कैसे बदलेगा 
युगों युगों से चलता आया हैं चक्र ये 
देवी देवता भी हैं तरसते सच्चे प्यार को।।

करो उजाला दिल में बाहर खुद ब  खुद हो जायेगा।।
तुम हो गए खुश तो सारा जहाँ भी खुश हो जायेगा 

साँसों को चलने दो, जिंदगी को बढ़ने दो।।

    क्यूँ सोचते हो ऐसा                  
    सूरज नया आयेगा
    सवेरा भी नया लायेगा मायूसी तोड़ो 
    खुद को फिर से खड़ा करो, धूळ झाडो और चल दो। 

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