Sunday, December 9, 2012

मेरा हाथ पकड़ने के बाद


वो परिंदा नही जो चला जाएगा..
वो तुम्हारा प्यार हैं कहाँ जाएगा..

कहाँ सुन पाएगी आँखें...
प्यार तो महसूस किया जाता हैं..
ना कहा जाता हैं..ना सुना जाता हैं..

तुमने कहा तो यकीन आया हैं..
सर्द शाम ने मुझे तुम्हारा एहसास कराया हैं ..

पहना जो स्वेटर तो लगा तुम आ गये..
जाने कब कैसे मेरे एहसासो पे छा गये

अब तक ढूँढ रहे हैं हम नब्ज़ अपनी..
जो खो गई थी आपके ........मेरा हाथ पकड़ने के बाद

उस शख्स ने आँखों से तबलीज् ही यूँ की,
की मैं बिन सोचे मोहब्बत पे ईमान ले आया.!

सच ही तो कहा हैं बुज़ुर्गो ने..
मोहब्बत ईमान की चीज़ हैं..

कहाँ जाओगे ये इल्ज़ाम लेकर
बहुत जी चुके हो मेरा नाम लेकर..

कैसे जियोगे इंटरनेट कनेक्सन बिना
इसी मे तो छिपा हैं..प्यार मेरा 

बिना हसरतो के कहीं प्यार हुआ करता हैं..
ये तो वो जज़्बा हैं जो बिना उठाए उठा करता हैं

आने वाला आएगा ..जाने वाला जाएगा..
क्या पता वो क्या लाएगा..क्या ले जाएगा..
इस उमीद पे क्या जीना..की लाटरी लग जाएगी
सवा लाख मे कौन सी किस्मत बदल जाएगी..????

आज का दिन बहुत अच्छा हैं..
चाँद ने किया आपको सजदा हैं..
सितारे भी साथ लाया हैं..
पता नही क्यूँ वो लगा रहा आपको
आज क्यूँ इतना मस्का हैं..

फायर जो हो ही गया, अब क्या होये..
पकाओ अब दुश्मनी...खाओ जब तक जी चाहे

जीभ हुई ज़हरीली अब
मीठा भर भर खाय..
मीठा पर बोले नही..
जाने क्या घट जाय

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