Sunday, February 10, 2013

हरे पत्ते आँधियो से नही गिरते





हरे पत्ते आँधियो से नही गिरते
तोड़ता हैं जब कोई असमय तब 
वो पेड़ पे नही टिकते....
छोड़ जाते हैं एक निशान उस टहनी पे
जिस पे वो उम्र भर रहते..


मेरे तुम्हारे बीच मे कैसे आ गया जमाना...
तुम हो मेरे तो क्या करेगा जमाना...

नही कर पाएँगे इज़हारे मोहब्बत सबके सामने..

डर लगता हैं..जमाना ना रोक ले..


मौनी अमावस्या या काली अमावस्या
मौन हो गये बेचारे..नही बची कोई समस्या

दिल चुराकर सब तू चुराए हैं

संपत्ति तो बन जाती हैं फिर से
बेचारा दिल कहाँ से लाए हैं

भूलना  गर आसान होता तो भूल जाते सब कुछ..

साथ बिताएलांहे, यादे, वादे , मुलाक़ते...और ना जाने क्या कुछ

बेबस इंसान का बस कहाँ चलता हैं

जिस से करता हैं प्यार 
वही झिड़क के चल देता हैं..

झाँक के देखो अपने भीतर

क्या जिंदगी ने तुझे कभी
अपना बनाया ही नही......
मैं नही मानती....दोस्त

नेकी हो या बदी

दोनो संग पली...
किसी ने लिया नेकी को दुलार
कोई बदी के संग चली..

मौत का ख़ौफ़ कब तक

जिंदा हैं तब तक
जब बाँध लिया कफ़न  सर पे..
मौत बची ना जिंदगी....सब सांसो तक

कुछ ऐसा ही अनुभव हमारा हैं

छलनी कर दिया..सारा तन....
जबकि एक भी वस्त्र नही उतारा हैं
भेद देती हैं आँखे हमको..
जब भी तेरी गली से मैने खुद को गुज़ारा हैं..

मेरी मोहब्बत इतनी पाकीज़ा हैं

सब कुछ नज़र आएगा साफ साफ..
ये मेरी पाक नज़र का नतीज़ा हैं..





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