Friday, August 23, 2013

भक्त की आर्त पुकार - Dard

दर्द..... दर्द ......
चारो ओर बिखरा हुआ ................दर्द..
किसी के पास maa  नही 

उसका दर्द..
किसी को पिता से 

दूरी का दर्द 
जिसके पास दोनो हैं..
उसको भरपेट भोजन नही हैं...
जिसको भोजन की भरपूरता हैं...
उसे किसी ना किसी 

बीमारी ने जकड़ा हैं..
जिसको बीमारी नही हैं..उसे
अपने ही रिश्तो ने 

बुरी तरह रगड़ा हैं
सब किसी ना किसी

दर्द मे उलझे हैं..
नही हैं कोई भी सुखी....

सब अंदर से बिखरे हैं..
कोई तो रास्ता दिखाओ...

हम सब को...
इन दर्द से.....आराम....दिलाओ...
प्रभु आओ....तुम आओ...

अब आ भी जाओ...

ये सर वो सर नही हैं
जिसे रख के मैं उठा लूं..
झुक गया जो तेरे दर पे
आता नही उठाना.......
मुझे रास आ गया हैं..
तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी
मुझे मिल गया ठिकाना






5 Comments:

At August 23, 2013 at 8:27 AM , Blogger शिवनाथ कुमार said...

भगवान की शरण में शुकून जरुर मिलता है
बहुत सुन्दर !

 
At August 23, 2013 at 8:45 PM , Anonymous Anonymous said...

sundar bhaav , sundar shabd ...sundar sandesh .!!

 
At August 23, 2013 at 8:46 PM , Anonymous Anonymous said...

sundar bhaav , sundar shabd ...sundar sandesh .!!

 
At August 24, 2013 at 4:13 AM , Blogger अपर्णा खरे said...

sach kaha apne...

 
At August 24, 2013 at 4:14 AM , Blogger अपर्णा खरे said...

thanks..

 

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