Tuesday, October 15, 2013

स्वेटर ...


उसके हाथो मे हैं जादू...  
जब बुनती हैं वो स्वेटर ... 
उष्मा....अंदर तक भर देती हैं... 
एक एक फंदे मे वो...  
अपना आशीर्वाद भर देती हैं वो.. 
माँ हैं ना वो.. 
ना जाने कैसे सब 
इतने प्यार से कर लेती हैं.. 

 

4 Comments:

At October 15, 2013 at 8:03 AM , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (16-10-2013) "ईदुलजुहा बहुत बहुत शुभकामनाएँ" (चर्चा मंचःअंक-1400) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

 
At October 17, 2013 at 12:02 AM , Blogger अपर्णा खरे said...

bahut bahut abhaar...uncle

 
At October 18, 2013 at 2:00 AM , Blogger sushmaa kumarri said...

भावो का सुन्दर समायोजन......

 
At October 18, 2013 at 11:37 PM , Blogger अपर्णा खरे said...

Shukria Sushma ji..

 

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