Tuesday, December 31, 2013

एक प्रशन..



जब नही रहेगा 
मेरे चेहरे पे तेज़..
मुरझा जाएँगी...

सब कलिया..
जीवन की..
उम्र भी बढ़ जाएगी....
झुर्रिया 

चेहरे पे बहुत 
आ जाएगी..
चेहरे की रौनक 

कहीं खो जाएगी..
बेकाबू होगा 

मेरा हाथ पाव.......
अशक्त होगी 

मेरी चाल.....
क्या तब भी 

तुम मुझे थामोगे.....
मेरा साथ 

निभाओगे..
मुझे इसी तरह चाहोगे.....

2 Comments:

At December 31, 2013 at 7:52 AM , Blogger रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
गये साल को है प्रणाम!
है नये साल का अभिनन्दन।।
लाया हूँ स्वागत करने को
थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
है नये साल का अभिनन्दन।।...
--
नवल वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

 
At January 2, 2014 at 8:14 PM , Anonymous Anonymous said...

kyun na chhod dete ham
waqt par kuchh anutrit sawalon ke javab
ye waqt hi to hai jo,
milata hai ghadi ki tamaam suiyon ko
parspr ..
sahi waqt ke aane par.??.

 

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