Tuesday, March 13, 2018

साथ

पुरुष स्त्री साथ साथ है
तभी बढ़ सकी जीवन की गाड़ी
जैसे
कठोर धरती के भीतर पनपते है कोमल बीज
जैसे
हार्ड बोर्ड पर टिका होता है
कंप्यूटर का mother बोर्ड
जैसे
बिना कठोर प्लाई के नही टिक सकता पलंग
वैसे ही कठिन संघर्षो के साथ बिताए हुए कोमल पल
जिंदगी को
बार बार एक साथ मिलकर
सोचने के लिए
मजबूर कर देते है
आपकी सुंदर कविता की तरहपुरुष स्त्री साथ साथ है
तभी बढ़ सकी जीवन की गाड़ी
जैसे
कठोर धरती के भीतर पनपते है कोमल बीज
जैसे
हार्ड बोर्ड पर टिका होता है
कंप्यूटर का mother बोर्ड
जैसे
बिना कठोर प्लाई के नही टिक सकता पलंग
वैसे ही कठिन संघर्षो के साथ बिताए हुए कोमल पल
जिंदगी को
बार बार एक साथ मिलकर
सोचने के लिए
मजबूर कर देते है

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