Thursday, September 22, 2011

खुला आसमान


विचरण करने को "खुला आसमान" मिला हैं...
गाने तो एक नया गान मिला हैं..
कैसे करे शुक्रिया दोस्त आपका....
आपके जानिब से मुझे सारा जहान मिला हैं
सबसे पहचान होती हैं..
रूबरू होते ही बात होती हैं..
बातो बातो मे नया ज्ञान मिला हैं..
आपके जानिब से मुझे सारा जहाँ मिला हैं
खुला हैं आसमान, पंख पसारो चाहे जीतने 
धरती की तरह, नही छोटा सा मकान मिला हैं
खुले और सुन्‍दर विचारो का विस्तृत वितान मिला हैं
आपके जानिब से मुझे सारा जहाँ मिला हैं.... 

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home