Saturday, March 24, 2012

दिल ही तो हैं..


दिल ही तो हैं..
ज़रा सी बात पे मचल जाता हैं
ना संभलो तो फिसल जाता हैं
लेकिन कभी सोचा हैं क्यूँ?
इसलिए की हम बड़े ..
होने का नाटक करते हैं
दिल से हमेशा होते हैं बच्चे
कभी कभी छोड़ देना चाहिए इसे
अपने हाल पे देखे कहाँ ले जाता हैं
किसकी याद दिलाता हैं
ये हमसे ज़्यादा सच्चा हैं
हमे पता हैं हमे वहीं ले जाएगा
जहाँ हमारा मॅन जाना चाहता हैं
तब हम घबराते हैं?
कहीं सच का पता
ना सबको चल जाए
इसीलिए किसी को
दिल की बात नही बताते हैं..

2 Comments:

At March 25, 2012 at 12:32 AM , Blogger बिखरे हुए अक्षरों का संगठन said...

अच्छी प्रेरणा दायक पंक्तियाँ ............
ज़रा सी बात पे मचल जाता हैं
ना संभलो तो फिसल जाता हैं
लेकिन कभी सोचा हैं क्यूँ?
इसलिए की हम बड़े ..
होने का नाटक करते हैं

 
At March 27, 2012 at 9:32 AM , Blogger aparna khare said...

thanks Rajendra ji...

 

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