Tuesday, March 27, 2012

हौसला दे रही थी...

अनवरत चलते रहे..
 दीए जलते रहे..
 डाला ना जाने कितना तेल
 फिर भी ना कर सके
 वक़्त का खुद से मेल
 उम्र के साथ साथ
 लालटेन के शीशे भी
काले पड़ गये
 फिर भी जीवन मे
उजाले ना हुए..
 बस मधिम सी
आशा की किरण
 अब भी बाकी थी..
 जो दे रही थी...हौसला
 जीने का..





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