Sunday, April 8, 2012

शायद यही प्यार


जब हम मिले तो
तुम्हारी आधी मुस्कुराहट
हमारी आधी मुस्कुराहट
मिल पूरी हुई
पूरी एक मुस्कुराहट....
भाग गई
बड़ी सी उदासी
दामन बचा कर..
ठहाका जो लगाया ..
दम लगा कर.............
(मिल गई थी जीने की वजह jo)

तुमने चुपके से मेरा हाथ दबाया
मैने सोचा लगता हैं
कोई नया ख़याल
तुम्हारे जहन मे आया..
मैं लगी मुस्कुराने........
कुछ सुगबुगाने..........
तुम भी हंस दिए

कल इमामबाड़े ki दीवार पे
अपना नाम लिखा देखा
जो बरसो पहले
हमने मिलकर लिखा था
आज भी चमक रहा था..
बस तुम नही थे.........
मेरे साथ..

छोटी छोटी बाते
रोज़ की मुलाक़ाते
ना मिलने पे बेचैन होना
पास होने पे लड़ते रहना
एक दूसरे का
ख़याल रखना
मनोभाव पढ़ लेना

(शायद यही प्यार कहलाता होगा पता नही आप बताए) 

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