Friday, June 1, 2012

हम हैं ना....बिना शर्तो के प्यार करते हैं....

तपती धरती पे राहत आई हैं.....जबसे तुम मुस्काई हो..

तुम्हारा मोबाइल, घड़ी, पर्स, वो सब यंत्र थे..इसलिए उनकी वॉरेंटी थी...मैं कोई यंत्र नही जो.....बिना बोले चलता जाता..

क्यूँ देखा उनकी ओर ऐसे ही निकल जाते

तुम्हारी बाते अब हमे अच्छी नही लगती
उसमे कुछ बनावट सी दिखती हैं.....
सच कहो क्या अब भी तुम मुझे
वैसा ही प्यार करते हो..?????

हरी तबीयत की खातिर कुछ भी कर सकते हो
गर्मी हो या बारिश, धूप मे भी खड़े रह सकते हो...

मत करो इतनी मोहब्बत की कोई रह नही पाए..
जाओ जो चले छोड़ कर आँसू ही टपकाए....

लेकिन जब तुम्हारा जी भर जाए तो क्या करते हो?
ये भी तो कहो....

तुम बदलो रंग या बदलो रूप
मुझे क्या फ़र्क पड़ता हैं........
नही रहना मुझे इस दुनिया मे
अब मेरा जी नही लगता हैं.......

कही तो उजाला रहने दो.........
दुनिया ना सही...मरघट को ही....रोशन करो..

ऐसा क्या कर डाला हैं
पुरानी बोतल मे नया माल भर डाला हैं


तुमने प्यार को सही ढंग से मापा हैं...सच प्यार बहुत गहरा हैं..........प्यार प्यार जो हैं..

जो चले गये दुनिया से वो बददुआ क्या देंगे
जीते जी जो नही कर सके, बाद मरने के वो पंगा क्या करेंगे

क्या करते वो हिन्दी के टीचर थे....
और हम उनके स्टूडेंट
वो व्याकरण मे उलझे रहे...हमने किए कई सवाल अंत

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