Wednesday, August 29, 2012




तुम शायद लौट आओ
वो वक़्त नही लौटेगा
सोंचना ही सोंचना है
शब्द नही लौटेंगे..........!
ये बात मन को

मालूम हैं लेकिन
बैरी हमारा मन उसे ही
हर वक़्त ढूँढे हैं..
बात बात पे रोता हैं,
अनकही को गुनता हैं
पिछली बातों को सहेजता हैं.........
सच कहा तुमने..
प्यार की बातें, बेकार की बातें
सब उसे दिल की गहराइयो से याद हैं....
दीवार से टिकाते ही सर,
सब स्पस्ट सी दीखने लगती हैं
साथ बिताया हर लम्हा ...
जिंदा हो उठता हैं..
यादो की चादर बिछा बैठ जाता हैं
करता हैं तुमसे ही ..
तुम्हारी बातें और ....रो बैठता हैं
क्या हैं ये प्यार
अब उसे समझ आया हैं
देता हैं दुख उम्र भर..
बुज़ुर्गो ने कितना सही बताया हैं

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