Tuesday, October 16, 2012

यादें यादें यादें




यादें यादें यादें
कब जाएँगी ये यादें
जीना दुश्वार कर रखा हैं..
मुझे कही का नही रखा हैं..
सच ..पीछा ही नही छोड़ती...

दिल जहाँ दिमाग़ सब पे
कब्जा जमा रखा हैं....
कुछ और सोचने ही नही देती...
मरी ये यादें....
तुमसे अलग होने ही नही देती
तंग आ गई हूँ इन यादो से.....
अब जाओ तुम मुझे तन्हा रहने दो
नही याद करना मुझे किसी को..

बोलते नही हैं लफ़्ज
कहने को मज़बूर करते हैं..
करती हूँ यहॉं को दूर
ये लौटने को मज़बूर करते हैं..
जहन भी जागता हैं..
पुरानी चिट्ठियो को बाँचता हैं...
क्या करू इन चिट्ठियों का.....
यादें मत याद आ तू हमे

दर ओ दीवार को क्या पड़ी हैं..
मुश्किल तो हम पे आ पड़ी हैं
सूझता नही कोई उपाय
आप ही बताओ.....
मुझे इन यादों से बचाओ..

माना हमारा मन भावुक हैं
नही से पता आघातो को...
लेकिन प्रिय तो दे जाते हैं दर्द
कैसे सहे उन पुरानी बातों को

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