Friday, February 22, 2013

चाँद






तुम भी कितना धमकाते हो यार
"चाँद" को भी नही छोड़ते
क्या करे बेचारा चाँद...
"चाँदनी" उसे छोड़ती ही नही
आना चाहता है तुम्हारे पास
लेकिन उनकी अठखेलिया 
उसे वक़्त ही नही देती
देख सके वो किसी और की और..
कल की ही बात हैं मैने बनाया
नरम गरम हलुवा
चाँद को भी बुलाया 
लेकिन बेचारा नही आ पाया
जबकि उसे हलवा कितना पसंद हैं
ये तुम भी जानते हो और मैं भी
हर कोई मज़बूर हैं
मेरी और तुम्हारी तरह....
नही आ सकता मिलने...
चाह कर भी....सोच कर भी
तब भी दुनिया चलती हैं...
हैं ना ..देखो
हम भी तो जी रहे हैं...
"चाँद " के बिना..
साथ के बिना..

11 Comments:

At February 23, 2013 at 2:29 AM , Blogger Tamasha-E-Zindagi said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति | आभार


Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

 
At February 23, 2013 at 6:26 AM , Blogger Tamasha-E-Zindagi said...

This comment has been removed by the author.

 
At February 23, 2013 at 6:31 AM , Blogger Tamasha-E-Zindagi said...

कल २४/०२/२०१३ को आपकी यह पोस्ट Bulletin of Blog पर लिंक की गयी हैं | आपके सुझावों का स्वागत है | धन्यवाद!

 
At February 23, 2013 at 11:25 PM , Blogger Sriram said...

वाह ....सुन्दर

 
At February 23, 2013 at 11:55 PM , Blogger कालीपद "प्रसाद" said...

khubsurat abhivyakti
latest postमेरे विचार मेरी अनुभूति: मेरी और उनकी बातें

 
At February 24, 2013 at 9:54 AM , Blogger ANULATA RAJ NAIR said...

:-)

और नहीं तो क्या...

अनु

 
At February 24, 2013 at 10:09 PM , Blogger HARSHVARDHAN said...

भावनात्मक और सुन्दर रचना।

नया लेख :- पुण्यतिथि : पं . अमृतलाल नागर

 
At February 24, 2013 at 11:15 PM , Blogger Unknown said...

shukriya Harshvardhan ji...

 
At February 24, 2013 at 11:16 PM , Blogger Unknown said...

abhaar Anu ji..

 
At February 24, 2013 at 11:17 PM , Blogger Unknown said...

abhaar Kalipad ji...

 
At February 24, 2013 at 11:17 PM , Blogger Unknown said...

abhaar Sriram ji..

 

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