Tuesday, October 15, 2013

सन्नाटा





दीवार के उस पार  
पसरा हैं सन्नाटा 
किसी के आने की आहट से  
चौंक जाती हैं पलके.. 
शायद अब भी  
इंतेज़ार हैं किसी का.. 
करके गया जो वादा.. 
जल्दी लौट कर आने का.. 
परदेसी था शायद... 
भूल गया रास्ता... 
लौट के आने का.... 
उसकी राह मे पलके भी शायद 
पत्थर हो चली हैं अब तो..

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