Wednesday, January 8, 2014

कोहरे की चादर...

आज आसमान ने ओढ़ ली हैं
कोहरे की चादर...
नही सूझता..कुछ भी यहाँ पर....
शायद.. ठंड ने अपने पाव..पसारे हैं...
तभी तो हम भी रज़ाई के मारे हैं....
तुम मत निकलना घर से आज.............
बुजुर्ग ने दी हमे सख़्त हिदायत हैं..
लेकिन क्या करे दिल 

नही लगता तुम्हारे बिना..
जल्दी से खोलो दरवाजा..

हम आ रहे हैं...तुम्हारे यहाँ..

5 Comments:

At January 8, 2014 at 6:33 AM , Blogger दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी प्रस्तुति गुरुवार को चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है |
आभार

 
At January 9, 2014 at 2:53 AM , Blogger Amrita Tanmay said...

अति सुन्दर ..

 
At January 9, 2014 at 6:47 AM , Blogger Kailash Sharma said...

बहुत खूब...

 
At January 9, 2014 at 10:00 PM , Blogger अपर्णा खरे said...

apka bahut bahut shukriya Dilbaag ji...

 
At January 9, 2014 at 10:02 PM , Blogger अपर्णा खरे said...

bahut bahut Abhaar...Dost...

 

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