Wednesday, June 4, 2014

सोंधी मिट्टी

मेरे गाव की सोंधी मिट्टी
भरती हैं मस्ती दिल मे..
वो घर के बाहर का चौबारा...
आज भी हैं खुश रहता..
जब मिल बैठते सारे बुजुर्ग...
गप्पे खूब लड़ाते.....
करते दूर देश की बातें
बच्चो संग उधम मचाते
परियो तक ले जाते..सबको..
भूत प्रेत से डराते
पंछी आते पानी पीते......
नये राग हैं गाते...........
अम्मा की सोंधी सी रोटी....
प्याज़ के संग खूब भाती
रहते मिलकर एक दूजे संग
प्यार की फसल .लहलहाती.
ऐसा गाव हैं मेरा...प्यारा गाव हैं मेरा

2 Comments:

At June 4, 2014 at 1:47 AM , Anonymous Anonymous said...

nice..........

 
At June 5, 2014 at 1:15 AM , Blogger अपर्णा खरे said...

thanks.....

 

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