Monday, January 23, 2017

कहाँ हो तुम?

दोस्त कहाँ हो
मोबाइल की स्क्रीन पर
हर समय तुम्हारा
चमकता चेहरा
याद दिलाता है
तुम बस आ ही रहे होंगे
सच तुम बिन हर लम्हा
खाली ख़ाली लगता है
कुछ भी नहीं बदला
बस मेरा ही वक़्त बदल गया है
तुम बिन मैं
या मेरे बिन सोचो
एक डरावना ख्वाब सा लगता था
लेकिन पल पल
मैं इस डरावने ख्वाब के साथ
जी रही हूँ
या यूं कहो मर रही हूँ
कहते है
मोहब्बत दो लोगो के बीच में होती है
जब एक मरता है तो
दूसरा अपने आप ही मर जाता है
मेरा भी हाल ऐसा ही है
तुम ही कहो
कैसे जियूँ?????

1 Comments:

At January 28, 2017 at 8:57 PM , Anonymous Anonymous said...

:) :(

 

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