Thursday, December 8, 2016

मेरी मौत के बाद तुम
 सब रोना मत
वो ही करना जो मुझे पसंद है
मेरी लाश को नीचे उतार कर
उसके सिरहाने एक लालटेन जला देना
सब चारोओर बिठा कर जगजीत सिंह की गज़ले लगा देना
सच उनकी गज़ले मुझे बहुत सुकून देती है
जब तैयार करने का वक़्त आये तो
मुझे मत नहलाना
क्योंकि जिंदगी में मैंने कभी कोई गन्दा काम नहीं किया
जिसके लिए मुझे नहाना पड़े
या तुम सब को मुझे नहलाना पड़े
मेरा जीवन गंगा की तरह पावन है
मेरे भीतर न जाने कितने भाव भरे है
सचाई है, गहराई है सब पानी में धुलकर बह जायेगी
सो यु ही तैयार करना मुझे
मुझे शांति बहुत पसंद है
जीते जी भी
मरने के बाद भी
मुझे सफेद कपडे पहनाना
क्योंकि उस से बेहतर कोई रंग नहीं
जब मुझे ले जाने का वक़्त आये तो
तुम सब रोना नहीं
क्यूंकि मेरा कोमल दिल तुम्हारा रोना
सह नहीं पायेगा
जब जीते जी किसी को नहीं रुलाया
तो अंतिम वक़्त ऐसी गुस्ताखी क्यों?
मुझे जला देना और मेरी राख पूरे खेतो में बिखर देना
ताकि जब उस राख से पैदा
 हुआ
जो कोई भी अनाज खाये 
वो मेरी तरह संतुष्ठ होकर
बिना शिकायत दुनिया से जाये

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