Wednesday, October 26, 2016

कहाँ से लाउ वो 
मजबूत कलेजा 
जो तुम बिन 
मुस्कुरा सके, 
याद आते हो तुम बहुत, 
तुम्हे भुला सके

कई रातों से 
नहीं सोई हूँ मैं
दे सके थपकियां 
तुम्हारे जैसी
मुझको नींद भर
सुला सके

जीना पड़ता है 
बिना तुम्हारे 
नहीं मानती ये आँखे
तुम्हारी बातें
बस यु ही 
रहती है बरसती
आ जाओ 
थाम लो मुझको
कि इन बेचैन आँखों को 
थोड़ा आराम मिले।

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