Tuesday, March 13, 2018

हुस्न और इश्क़


हुस्न है
इश्क़ कही
खो गया

हुस्न ने
दिखाए नखरे
इश्क़
किसी और का
हो लिया

अब हुस्न
अकेला है
इश्क़ के पास
मेला ही मेला है

हुस्न का गुमान
बहुत बड़ा है..........

वो इश्क़ के
दरवाजे के बाहर
खड़ा है
इश्क़ बुलाये
हुस्न अंदर आए

लेकिन
इश्क़ कब तक,
क्योंकर बुलाये????

इश्क़ को
ताकत है
हुस्न को
बेजारी है

इश्क़ है
सबको प्यारा
हुस्न के पास
अदा ए कातिल
सारी है
अब कौन
किसे समझाये
वक़्त दे
उन्हें मोहलत

दोनो कुछ कुछ
एक दूजे को
समझ पाए

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